गले में लटकाए रहती हैं जिससे मालूम हो कि हम सब फलाने की लौंडी हैं।
कुमार-क्या यहां कई राजकुमारी हैं जो लौंडियों की पहचान में गड़बड़ी हो जाने का डर है?
पहली-नहीं, यहां सिर्फ दो राजकुमारी हैं और दोनों के यहां यही चलन है, कोई अपने मालिक का नाम नहीं ले सकता। जब पहचान की जरूरत होती है तो गले की तस्वीर दिखा दी जाती है।
कुमार-भला मुझे भी वह तस्वीर दिखाओगी?
“हां, हां, लो देख लो!” कहकर एक ने अपने गले में की छोटी-सी तस्वीर
गले में लटकाए रहती हैं जिससे मालूम हो कि हम सब फलाने की लौंडी हैं।
कुमार-क्या यहां कई राजकुमारी हैं जो लौंडियों की पहचान में गड़बड़ी हो जाने का डर है?
पहली-नहीं, यहां सिर्फ दो राजकुमारी हैं और दोनों के यहां यही चलन है, कोई अपने मालिक का नाम नहीं ले सकता। जब पहचान की जरूरत होती है तो गले की तस्वीर दिखा दी जाती है।
कुमार-भला मुझे भी वह तस्वीर दिखाओगी?
“हां, हां, लो देख लो!” कहकर एक ने अपने गले में की छोटी-सी तस्वीर