लोगों का मालिक कोई भी नहीं या अगर है तो एक तस्वीर, तब हमने उसका क्या बिगाड़ा? क्यों हमें बांधा के ले चलोगी?
औरत-हमारी राजकुमारी सबों की नजरों से छिपकर अपने राज्य भर में घूमा करती हैं और अपने मकान और बगीचों की सैर किया करती हैं मगर किसी की निगाह उन पर नहीं पड़ती। हम लोग रोज बाग और कमरों की सफाई करती हैं, और रोज ही कमरों का सामान, फर्श, पलंग के बिछौने वगैरह ऐसे हो जाते हैं जैसे किसी के मसरफ में आये हों। वह रौंदे जाते और मैले भी हो जाते हैं,
लोगों का मालिक कोई भी नहीं या अगर है तो एक तस्वीर, तब हमने उसका क्या बिगाड़ा? क्यों हमें बांधा के ले चलोगी?
औरत-हमारी राजकुमारी सबों की नजरों से छिपकर अपने राज्य भर में घूमा करती हैं और अपने मकान और बगीचों की सैर किया करती हैं मगर किसी की निगाह उन पर नहीं पड़ती। हम लोग रोज बाग और कमरों की सफाई करती हैं, और रोज ही कमरों का सामान, फर्श, पलंग के बिछौने वगैरह ऐसे हो जाते हैं जैसे किसी के मसरफ में आये हों। वह रौंदे जाते और मैले भी हो जाते हैं,