चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



उसी वक्त कई जासूस दरबार में पहुंचे जिनकी सूरत से घबराहट और परेशानी साफ मालूम होती थी। तेजसिंह के बाप दीवान जीतसिंह ने उन जासूसों से पूछा, “क्या बात है जो तुम लोग इस तरह घबराये हुए आये हो?”

एक जासूस ने कुछ आगे बढ़के जवाब दिया, “लश्कर से कुमार की खबर लाया हूं।”

जीत-क्या हाल है, जल्द कहो।

जासूस-दो रोज से उनका कहीं पता नहीं है।

जीत-क्या कहीं चले गये?

जासूस-जी नहीं, रात को खेमे में सोये हुए थे, उसी हालत में कुछ औरतें उन्हें उठा ले गईं,


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उसी वक्त कई जासूस दरबार में पहुंचे जिनकी सूरत से घबराहट और परेशानी साफ मालूम होती थी। तेजसिंह के बाप दीवान जीतसिंह ने उन जासूसों से पूछा, “क्या बात है जो तुम लोग इस तरह घबराये हुए आये हो?”

एक जासूस ने कुछ आगे बढ़के जवाब दिया, “लश्कर से कुमार की खबर लाया हूं।”

जीत-क्या हाल है, जल्द कहो।

जासूस-दो रोज से उनका कहीं पता नहीं है।

जीत-क्या कहीं चले गये?

जासूस-जी नहीं, रात को खेमे में सोये हुए थे, उसी हालत में कुछ औरतें उन्हें उठा ले गईं,


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