इनकी बातों का कुछ ख्याल मत करो?
शिव-उल्टे मुझी को पागल बनाती है!
तेज-(शिवद्त्त से) क्या कहा, फिर तो कहो?
शिव-कुछ नहीं, तुम चपला से बातें करो, मैं तो आजकल पागल हो गया हूं।
देवी-वाह, क्या पागल बने हैं।
शिव-चपला का कहना बहुत सही है, मेरे पागल होने में कोई शक नहीं।
कुमार-ज्योतिषीजी, जरा इन नई गढ़न्त के पागल को देखना!
ज्यो-(हंसकर) जब आकाशवाणी हो ही चुकी कि ये पागल हैं तो अब क्या बाकी रहा?
कुमार-दिल में कई तरह के खुटके पैदा होते हैं।
इनकी बातों का कुछ ख्याल मत करो?
शिव-उल्टे मुझी को पागल बनाती है!
तेज-(शिवद्त्त से) क्या कहा, फिर तो कहो?
शिव-कुछ नहीं, तुम चपला से बातें करो, मैं तो आजकल पागल हो गया हूं।
देवी-वाह, क्या पागल बने हैं।
शिव-चपला का कहना बहुत सही है, मेरे पागल होने में कोई शक नहीं।
कुमार-ज्योतिषीजी, जरा इन नई गढ़न्त के पागल को देखना!
ज्यो-(हंसकर) जब आकाशवाणी हो ही चुकी कि ये पागल हैं तो अब क्या बाकी रहा?
कुमार-दिल में कई तरह के खुटके पैदा होते हैं।