चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



यह सुन दीवान जीतसिंह ने कहा, “बस-बस, सब हाल मालूम हो गया, अब तुम अपने डेरे में जाओ।” इसके बाद थोड़ा & सा लखलखा देकर उन सरदारों को भी बिदा किया और यह कह दिया कि इसे सुंघाकर आप उन लोगों को होश में लाइए जो बेहोश हैं और दीवान हरदयालसिंह को कहा कि अभी आप यहीं बैठिए।

सब आदमी बिदा कर दिए गए, राजा सुरेन्द्रसिंह, जीतसिंह और दीवान हरदयालसिंह रह गए।

राजा सुरेन्द्र – (दीवान जीतसिंह की तरफ देखकर) महाराज को छुड़ाने की कोई फिक्र होनी चाहिए।


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यह सुन दीवान जीतसिंह ने कहा, “बस-बस, सब हाल मालूम हो गया, अब तुम अपने डेरे में जाओ।” इसके बाद थोड़ा & सा लखलखा देकर उन सरदारों को भी बिदा किया और यह कह दिया कि इसे सुंघाकर आप उन लोगों को होश में लाइए जो बेहोश हैं और दीवान हरदयालसिंह को कहा कि अभी आप यहीं बैठिए।

सब आदमी बिदा कर दिए गए, राजा सुरेन्द्रसिंह, जीतसिंह और दीवान हरदयालसिंह रह गए।

राजा सुरेन्द्र – (दीवान जीतसिंह की तरफ देखकर) महाराज को छुड़ाने की कोई फिक्र होनी चाहिए।


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