क्या ही आफत मचाता हूं। तुम चारों ऐयार हो और मैं ऐयारी नहीं जानता तिस पर भी तुम लोग मुझे गिरफ्तार नहीं कर सकते, लानत है तुम्हारी ऐयारी पर।”
इस तरह के बहुत से पुरजे लिखकर और थोड़ी & सी गोंद तैयार कर बटुए में रख ली और किले की तरफ रवाना हुए। पहुंचते – पहुंचते शाम हो गई,अस्तु किले के इधर – उधर घूमने लगे। जब खूब अंधेरा हो गया, मौका पाकर एक दीवार पर जो नीची और टूटी हुई थी कमंद लगाकर चढ़ गये। अंदर सन्नाटा पाकर उतरे और घूमने लगे।
क्या ही आफत मचाता हूं। तुम चारों ऐयार हो और मैं ऐयारी नहीं जानता तिस पर भी तुम लोग मुझे गिरफ्तार नहीं कर सकते, लानत है तुम्हारी ऐयारी पर।”
इस तरह के बहुत से पुरजे लिखकर और थोड़ी & सी गोंद तैयार कर बटुए में रख ली और किले की तरफ रवाना हुए। पहुंचते – पहुंचते शाम हो गई,अस्तु किले के इधर – उधर घूमने लगे। जब खूब अंधेरा हो गया, मौका पाकर एक दीवार पर जो नीची और टूटी हुई थी कमंद लगाकर चढ़ गये। अंदर सन्नाटा पाकर उतरे और घूमने लगे।