दुनिया इतनी ही बड़ी थी, अब खतम हो गई। हाँ-हाँ, दौड़ी क्यों जाती हो, लो मैं भी आया।’
इतना कह और पहाड़ी के नीचे की तरफ देख कुमार कूद कर अपनी जान देना ही चाहते थे और तीनों ऐयार सन्न खड़े देख ही रहे थे कि यकायक भारी आवाज के साथ दालान के एक तरफ की दीवार फट गई और उसमें से एक वृद्ध महापुरुष ने निकल कर कुमार का हाथ पकड़ लिया।
कुमार ने फिर कर देखा। लगभग अस्सी वर्ष की उम्र, लंबी-लंबी सफेद रूई की तरह दाढ़ी नाभी तक आई हुई, सिर की लंबी जटा जमीन तक लटकती हुई,
दुनिया इतनी ही बड़ी थी, अब खतम हो गई। हाँ-हाँ, दौड़ी क्यों जाती हो, लो मैं भी आया।’
इतना कह और पहाड़ी के नीचे की तरफ देख कुमार कूद कर अपनी जान देना ही चाहते थे और तीनों ऐयार सन्न खड़े देख ही रहे थे कि यकायक भारी आवाज के साथ दालान के एक तरफ की दीवार फट गई और उसमें से एक वृद्ध महापुरुष ने निकल कर कुमार का हाथ पकड़ लिया।
कुमार ने फिर कर देखा। लगभग अस्सी वर्ष की उम्र, लंबी-लंबी सफेद रूई की तरह दाढ़ी नाभी तक आई हुई, सिर की लंबी जटा जमीन तक लटकती हुई,