जमीन फट गई और उसमें से वनकन्या ने निकल कर कुमार के पाँव पकड़ लिए।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : पहला बयान)
वनकन्या को एकाएक ज़मीन से निकल पैर पकड़ते देख कुंवर वीरेन्द्रसिंह एकदम घबरा उठे। देर तक सोचते रहे कि यह क्या मामला है, यहां वनकन्या क्योंकर आ पहुंची और यह योगी कौन हैं जो इसकी मदद कर रहे हैं? आखिर बहुत देर तक चुप रहने के बाद कुमार ने योगी से कहा, “मैं इस वनकन्या को जानता हूं। इसने हम पर बड़ा भारी उपकार किया है और मैं इससे बहुत कुछ वादा कर भी चुका हूं,
जमीन फट गई और उसमें से वनकन्या ने निकल कर कुमार के पाँव पकड़ लिए।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : पहला बयान)
वनकन्या को एकाएक ज़मीन से निकल पैर पकड़ते देख कुंवर वीरेन्द्रसिंह एकदम घबरा उठे। देर तक सोचते रहे कि यह क्या मामला है, यहां वनकन्या क्योंकर आ पहुंची और यह योगी कौन हैं जो इसकी मदद कर रहे हैं? आखिर बहुत देर तक चुप रहने के बाद कुमार ने योगी से कहा, “मैं इस वनकन्या को जानता हूं। इसने हम पर बड़ा भारी उपकार किया है और मैं इससे बहुत कुछ वादा कर भी चुका हूं,