किसी जगह बैठकर ईश्वर का नाम लूँगा, अब मुँह किसी को दिखाना नहीं चाहता, बस और कोई आरजू नहीं है!
सुरेन्द्रसिंह : आपके रिश्ते की जितनी औरतें चुनार में हैं सभी की अच्छी तरह से परवरिश होगी, उनके लिए आपको कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपको छोड़ देने में कई बातों का खयाल है।
शिव : कुछ नहीं, (जनेऊ हाथ में लेकर) मैं धर्म की कसम खाता हूं, अब जी में किसी तरह की बुराई नहीं है, कभी आपकी बुराई न सोचूंगा।
सुरेन्द्र : अभी आपकी उम्र भी इस लायक नहीं हुई है कि आप तपस्या करें।
किसी जगह बैठकर ईश्वर का नाम लूँगा, अब मुँह किसी को दिखाना नहीं चाहता, बस और कोई आरजू नहीं है!
सुरेन्द्रसिंह : आपके रिश्ते की जितनी औरतें चुनार में हैं सभी की अच्छी तरह से परवरिश होगी, उनके लिए आपको कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपको छोड़ देने में कई बातों का खयाल है।
शिव : कुछ नहीं, (जनेऊ हाथ में लेकर) मैं धर्म की कसम खाता हूं, अब जी में किसी तरह की बुराई नहीं है, कभी आपकी बुराई न सोचूंगा।
सुरेन्द्र : अभी आपकी उम्र भी इस लायक नहीं हुई है कि आप तपस्या करें।