दोनों तरफ दो जामुन के पेड़ कैसे ऊँचे दिखाई दे रहे हैं।
तेजसिंह – ‘हम भी इस बाग की सैर कर लेते तो बेहतर था।’
कुमार – ‘चलो घूमो, मैं ख्याल करता हूँ कि उस कमरे का दरवाजा भी खुला होगा, जिसमें कुमारी चंद्रकांता की तस्वीर देखी थी।’
चारों आदमी उस बाग में घूमने लगे।
कमरे के दरवाजे खुले हुए थे, जो-जो चीजें पहले कुमार ने देखी थीं, आज भी नजर पड़ीं। सफाई भी अच्छी थी, किसी जगह गर्द या कतवार का नामो-निशान न था।
पहली दफा जब कुमार इस बाग में आए थे तब इनकी दूसरी ही हालत थी,
दोनों तरफ दो जामुन के पेड़ कैसे ऊँचे दिखाई दे रहे हैं।
तेजसिंह – ‘हम भी इस बाग की सैर कर लेते तो बेहतर था।’
कुमार – ‘चलो घूमो, मैं ख्याल करता हूँ कि उस कमरे का दरवाजा भी खुला होगा, जिसमें कुमारी चंद्रकांता की तस्वीर देखी थी।’
चारों आदमी उस बाग में घूमने लगे।
कमरे के दरवाजे खुले हुए थे, जो-जो चीजें पहले कुमार ने देखी थीं, आज भी नजर पड़ीं। सफाई भी अच्छी थी, किसी जगह गर्द या कतवार का नामो-निशान न था।
पहली दफा जब कुमार इस बाग में आए थे तब इनकी दूसरी ही हालत थी,