इस जगह भोजन किया था, इस जगह सो गए थे कि दूसरे बाग में पहुँचे।’
तेजसिंह ने कहा – ‘दोपहर को भोजन करके सो रहने के बाद आप जिस कमरे में पहुँचे थे, जरूर उस बाग का रास्ता भी कहीं इस बाग में से ही होगा, अच्छी तरह घूम के खोजना चाहिए।’
कुमार – ‘मैं भी यही सोचता हूँ।’
देवीसिंह – (कुमार से) ‘पहली दफा जब आप इस बाग में आए थे तो खूब खातिर की गई थी, नहा कर पहनने के कपड़े मिले, पूजा-पाठ का सामान दुरुस्त था, भोजन करने के लिए अच्छी-अच्छी
इस जगह भोजन किया था, इस जगह सो गए थे कि दूसरे बाग में पहुँचे।’
तेजसिंह ने कहा – ‘दोपहर को भोजन करके सो रहने के बाद आप जिस कमरे में पहुँचे थे, जरूर उस बाग का रास्ता भी कहीं इस बाग में से ही होगा, अच्छी तरह घूम के खोजना चाहिए।’
कुमार – ‘मैं भी यही सोचता हूँ।’
देवीसिंह – (कुमार से) ‘पहली दफा जब आप इस बाग में आए थे तो खूब खातिर की गई थी, नहा कर पहनने के कपड़े मिले, पूजा-पाठ का सामान दुरुस्त था, भोजन करने के लिए अच्छी-अच्छी