और रंगों के साथ कालिख भी बने और मुखियों के मुँह पर कालिख ही पोती जाए। होली में कोई बोल ही क्या सकता है! फिर स्वाँग निकले और पंचों की भद्द उड़ाई जाए। रुपए-पैसे की कोई चिंता नहीं। गोबर भाई कमा कर लाए हैं।
भोजन करके गोबर भोला से मिलने चला। जब तक अपनी जोड़ी ला कर अपने द्वार पर बाँध न दे, उसे चैन नहीं। वह लड़ने-मरने को तैयार था।
होरी ने कातर स्वर में कहा - रार मत बढ़ाओ बेटा! भोला गोई ले गए, भगवान उनका भला करे, लेकिन उनके रुपए तो आते ही थे।
और रंगों के साथ कालिख भी बने और मुखियों के मुँह पर कालिख ही पोती जाए। होली में कोई बोल ही क्या सकता है! फिर स्वाँग निकले और पंचों की भद्द उड़ाई जाए। रुपए-पैसे की कोई चिंता नहीं। गोबर भाई कमा कर लाए हैं।
भोजन करके गोबर भोला से मिलने चला। जब तक अपनी जोड़ी ला कर अपने द्वार पर बाँध न दे, उसे चैन नहीं। वह लड़ने-मरने को तैयार था।
होरी ने कातर स्वर में कहा - रार मत बढ़ाओ बेटा! भोला गोई ले गए, भगवान उनका भला करे, लेकिन उनके रुपए तो आते ही थे।