कौन मुझे बिरादरी से अलग करता है, लेकिन तुम बैठे ताकते रहे।
होरी ने अपराधी की भाँति सिर झुका लिया, लेकिन धनिया यह अनीति कैसे देख सकती थी? बोली - बेटा, तुम भी अंधेर करते हो। हुक्का-पानी बंद हो जाता, तो गाँव में निर्वाह कैसे होता, जवान लड़की बैठी है, उसका भी कहीं ठिकाना लगाना है या नहीं? मरने-जीने में आदमी बिरादरी?
गोबर ने बात काटी - हुक्का-पानी सब तो था, बिरादरी में आदर भी था, फिर मेरा ब्याह क्यों नहीं हुआ? बोलो! इसलिए
कौन मुझे बिरादरी से अलग करता है, लेकिन तुम बैठे ताकते रहे।
होरी ने अपराधी की भाँति सिर झुका लिया, लेकिन धनिया यह अनीति कैसे देख सकती थी? बोली - बेटा, तुम भी अंधेर करते हो। हुक्का-पानी बंद हो जाता, तो गाँव में निर्वाह कैसे होता, जवान लड़की बैठी है, उसका भी कहीं ठिकाना लगाना है या नहीं? मरने-जीने में आदमी बिरादरी?
गोबर ने बात काटी - हुक्का-पानी सब तो था, बिरादरी में आदर भी था, फिर मेरा ब्याह क्यों नहीं हुआ? बोलो! इसलिए