से डंडा उठाया और गोबर के पीछे दौड़ा। गाँव के बाहर आ कर उसने निगाह दौड़ाई। एक क्षीण-सी रेखा क्षितिज से मिली हुई दिखाई दी। इतनी ही देर में गोबर इतनी दूर कैसे निकल गया। होरी की आत्मा उसे धिक्कारने लगी। उसने क्यों गोबर को रोका नहीं? अगर वह डाँट कर कह देता, भोला के घर मत जाओ, तो गोबर कभी न जाता। और अब उससे दौड़ा भी तो नहीं जाता। वह हार कर वहीं बैठ गया और बोला - उसकी रच्छा करो महावीर स्वामी!
गोबर उस गाँव में पहुँचा तो देखा,
से डंडा उठाया और गोबर के पीछे दौड़ा। गाँव के बाहर आ कर उसने निगाह दौड़ाई। एक क्षीण-सी रेखा क्षितिज से मिली हुई दिखाई दी। इतनी ही देर में गोबर इतनी दूर कैसे निकल गया। होरी की आत्मा उसे धिक्कारने लगी। उसने क्यों गोबर को रोका नहीं? अगर वह डाँट कर कह देता, भोला के घर मत जाओ, तो गोबर कभी न जाता। और अब उससे दौड़ा भी तो नहीं जाता। वह हार कर वहीं बैठ गया और बोला - उसकी रच्छा करो महावीर स्वामी!
गोबर उस गाँव में पहुँचा तो देखा,