गोदान - Godan

कुछ लोग बरगद के नीचे बैठे जुआ खेल रहे हैं। उसे देख कर लोगों ने समझा, पुलिस का सिपाही है। कौड़ियाँ समेट कर भागे कि सहसा जंगी ने उसे पहचान कर कहा - अरे, यह तो गोबरधन है।

गोबर ने देखा, जंगी पेड़ की आड़ में खड़ा झाँक रहा है। बोला - डरो, मत जंगी भैया, मैं हूँ। राम-राम आज ही आया हूँ। सोचा, चलूँ सबसे मिलता आऊँ, फिर न जाने कब आना हो। मैं तो भैया, तुम्हारे आसिरवाद से बड़े मजे में निकल गया। जिस राजा की नौकरी में हूँ, उन्होंने


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कुछ लोग बरगद के नीचे बैठे जुआ खेल रहे हैं। उसे देख कर लोगों ने समझा, पुलिस का सिपाही है। कौड़ियाँ समेट कर भागे कि सहसा जंगी ने उसे पहचान कर कहा - अरे, यह तो गोबरधन है।

गोबर ने देखा, जंगी पेड़ की आड़ में खड़ा झाँक रहा है। बोला - डरो, मत जंगी भैया, मैं हूँ। राम-राम आज ही आया हूँ। सोचा, चलूँ सबसे मिलता आऊँ, फिर न जाने कब आना हो। मैं तो भैया, तुम्हारे आसिरवाद से बड़े मजे में निकल गया। जिस राजा की नौकरी में हूँ, उन्होंने


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