लेकिन दो पैसे रोज तो चाहिए ही। तुम कामता से कुछ न कहना। मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।'
'हाँ-हाँ बेखटके चलो। होली के बाद।'
'तो पक्की रही।'
दोनों आदमी बातें करते भोला के द्वार पर आ पहुँचे। भोला बैठे सुतली कात रहे थे। गोबर ने लपक कर उनके चरण छुए और इस वक्त उसका गला सचमुच भर आया। बोला - काका, मुझसे जो कुछ भूल-चूक हुई, उसे छमा करो।
भोला ने सुतली कातना बंद कर दिया और पथरीले स्वर में बोला - काम तो तुमने ऐसा ही किया था गोबर,
लेकिन दो पैसे रोज तो चाहिए ही। तुम कामता से कुछ न कहना। मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।'
'हाँ-हाँ बेखटके चलो। होली के बाद।'
'तो पक्की रही।'
दोनों आदमी बातें करते भोला के द्वार पर आ पहुँचे। भोला बैठे सुतली कात रहे थे। गोबर ने लपक कर उनके चरण छुए और इस वक्त उसका गला सचमुच भर आया। बोला - काका, मुझसे जो कुछ भूल-चूक हुई, उसे छमा करो।
भोला ने सुतली कातना बंद कर दिया और पथरीले स्वर में बोला - काम तो तुमने ऐसा ही किया था गोबर,