कि तुम्हारा सिर काट लूँ तो भी पाप न लगे, लेकिन अपने द्वार पर आए हो, अब क्या कहूँ। जाओ, जैसा मेरे साथ किया, उसकी सजा भगवान देंगे। कब आए?
गोबर ने खूब नमक-मिर्च लगा कर अपने भाग्योदय का वृत्तांत कहा - और जंगी को अपने साथ ले जाने की अनुमति माँगी। भोला को जैसे बेमाँगे वरदान मिल गया। जंगी घर पर एक-न-एक उपद्रव करता रहता था। बाहर चला जायगा, तो चार पैसे पैदा तो करेगा। न किसी को कुछ दे, अपना बोझ तो उठा लेगा।
गोबर ने कहा - नहीं काका,
कि तुम्हारा सिर काट लूँ तो भी पाप न लगे, लेकिन अपने द्वार पर आए हो, अब क्या कहूँ। जाओ, जैसा मेरे साथ किया, उसकी सजा भगवान देंगे। कब आए?
गोबर ने खूब नमक-मिर्च लगा कर अपने भाग्योदय का वृत्तांत कहा - और जंगी को अपने साथ ले जाने की अनुमति माँगी। भोला को जैसे बेमाँगे वरदान मिल गया। जंगी घर पर एक-न-एक उपद्रव करता रहता था। बाहर चला जायगा, तो चार पैसे पैदा तो करेगा। न किसी को कुछ दे, अपना बोझ तो उठा लेगा।
गोबर ने कहा - नहीं काका,