और आराम से है। और मैं उसके खून का प्यासा बन गया था।'
संध्या के समय गोबर यहाँ से चला, तो गोई उसके साथ थी और दही की दो हाड़ियाँ लिए जंगी पीछे-पीछे आ रहा था।
भाग 21
देहातों में साल के छ: महीने किसी न किसी उत्सव में ढोल-मजीरा बजता रहता है। होली के एक महीना पहले से एक महीना बाद तक फाग उड़ती है, असाढ़ लगते ही आल्हा शुरू हो जाता है और सावन-भादों में कजलियाँ होती हैं। कजलियों के बाद रामायण-गान होने लगता है। सेमरी भी अपवाद
और आराम से है। और मैं उसके खून का प्यासा बन गया था।'
संध्या के समय गोबर यहाँ से चला, तो गोई उसके साथ थी और दही की दो हाड़ियाँ लिए जंगी पीछे-पीछे आ रहा था।
भाग 21
देहातों में साल के छ: महीने किसी न किसी उत्सव में ढोल-मजीरा बजता रहता है। होली के एक महीना पहले से एक महीना बाद तक फाग उड़ती है, असाढ़ लगते ही आल्हा शुरू हो जाता है और सावन-भादों में कजलियाँ होती हैं। कजलियों के बाद रामायण-गान होने लगता है। सेमरी भी अपवाद