'कैसा पागल है?'
'नहीं सरकार, एक रूपया छोटी ठकुराइन का नजराना है, एक रूपया बड़ी ठकुराइन का। एक रूपया ठकुराइन के पान खाने को, एक बड़ी ठकुराइन के पान खाने को। बाकी बचा एक, वह आपकी करिया-करम के लिए।'
इसी तरह नोखेराम और पटेश्वरी और दातादीन की - बारी-बारी से सबकी खबर ली गई। और फबतियों में चाहे कोई नयापन न हो, और नकलें पुरानी हों, लेकिन गिरधारी का ढंग ऐसा हास्यजनक था, दर्शक इतने सरल हृदय थे कि बेबात की बात में भी हँसते थे। रात-भर भंड़ैती होती रही और सताए हुए दिल,
'कैसा पागल है?'
'नहीं सरकार, एक रूपया छोटी ठकुराइन का नजराना है, एक रूपया बड़ी ठकुराइन का। एक रूपया ठकुराइन के पान खाने को, एक बड़ी ठकुराइन के पान खाने को। बाकी बचा एक, वह आपकी करिया-करम के लिए।'
इसी तरह नोखेराम और पटेश्वरी और दातादीन की - बारी-बारी से सबकी खबर ली गई। और फबतियों में चाहे कोई नयापन न हो, और नकलें पुरानी हों, लेकिन गिरधारी का ढंग ऐसा हास्यजनक था, दर्शक इतने सरल हृदय थे कि बेबात की बात में भी हँसते थे। रात-भर भंड़ैती होती रही और सताए हुए दिल,