गोदान - Godan

तुम्हारी एक-एक पाई चुकाऊँगा। लड़के की बातों पर मत जाओ। मामला तो हमारे-तुम्हारे बीच में हुआ है। वह कौन होता है?

दातादीन जरा नरम पड़े - जरा इसकी जबर्दस्ती देखो, कहता है, दो सौ रुपए के सत्तर लो या अदालत जाओ। अभी अदालत की हवा नहीं खाई है, जभी। एक बार किसी के पाले पड़ जाएँगे, तो फिर यह ताव न रहेगा। चार दिन सहर में क्या रहे, तानासाह हो गए!

'मैं तो कहता हूँ महाराज, मैं तुम्हारी एक-एक पाई चुकाऊँगा।'

'तो कल से हमारे यहाँ काम करने आना पड़ेगा।'


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तुम्हारी एक-एक पाई चुकाऊँगा। लड़के की बातों पर मत जाओ। मामला तो हमारे-तुम्हारे बीच में हुआ है। वह कौन होता है?

दातादीन जरा नरम पड़े - जरा इसकी जबर्दस्ती देखो, कहता है, दो सौ रुपए के सत्तर लो या अदालत जाओ। अभी अदालत की हवा नहीं खाई है, जभी। एक बार किसी के पाले पड़ जाएँगे, तो फिर यह ताव न रहेगा। चार दिन सहर में क्या रहे, तानासाह हो गए!

'मैं तो कहता हूँ महाराज, मैं तुम्हारी एक-एक पाई चुकाऊँगा।'

'तो कल से हमारे यहाँ काम करने आना पड़ेगा।'


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