जब तक मैं जीता हूँ, मुझे अपने रस्ते चलने दो। जब मैं मर जाऊँ, तो तुम्हारी जो इच्छा हो, वह करना।'
'तो फिर तुम्हीं देना। मैं तो अपने हाथों अपने पाँव में कुल्हाड़ी न मारूँगा। मेरा गधापन था कि तुम्हारे बीच में बोला - तुमने खाया है, तुम भरो। मैं क्यों अपनी जान दूँ?'
यह कहता हुआ गोबर भीतर चला गया। झुनिया ने पूछा - आज सबेर-सबेरे दादा से क्यों उलझ पड़े?
गोबर ने सारा वृत्तांत कह सुनाया और अंत में बोला - इनके ऊपर रिन का बोझ
जब तक मैं जीता हूँ, मुझे अपने रस्ते चलने दो। जब मैं मर जाऊँ, तो तुम्हारी जो इच्छा हो, वह करना।'
'तो फिर तुम्हीं देना। मैं तो अपने हाथों अपने पाँव में कुल्हाड़ी न मारूँगा। मेरा गधापन था कि तुम्हारे बीच में बोला - तुमने खाया है, तुम भरो। मैं क्यों अपनी जान दूँ?'
यह कहता हुआ गोबर भीतर चला गया। झुनिया ने पूछा - आज सबेर-सबेरे दादा से क्यों उलझ पड़े?
गोबर ने सारा वृत्तांत कह सुनाया और अंत में बोला - इनके ऊपर रिन का बोझ