वह तो देने ही पड़ेंगे। फिर ब्राह्मण ठहरे। इनका पैसा हमें पचेगा? ऐसा माल तो इन्हीं लोगों को पचता है।
गोबर ने त्योरियाँ चढ़ाईं - नीति छोड़ने को कौन कह रहा है? और कौन कह रहा है कि ब्राह्मण का पैसा दबा लो? मैं तो यह कहता हूँ कि इतना सूद नहीं देंगे। बैंक वाले बारह आने सूद लेते हैं। तुम एक रूपया ले लो। और क्या किसी को लूट लोगे?
'उनका रोयाँ जो दु:खी होगा?'
'हुआ करे। उनके दु:खी होने के डर से हम बिल क्यों खोदें?'
'बेटा,
वह तो देने ही पड़ेंगे। फिर ब्राह्मण ठहरे। इनका पैसा हमें पचेगा? ऐसा माल तो इन्हीं लोगों को पचता है।
गोबर ने त्योरियाँ चढ़ाईं - नीति छोड़ने को कौन कह रहा है? और कौन कह रहा है कि ब्राह्मण का पैसा दबा लो? मैं तो यह कहता हूँ कि इतना सूद नहीं देंगे। बैंक वाले बारह आने सूद लेते हैं। तुम एक रूपया ले लो। और क्या किसी को लूट लोगे?
'उनका रोयाँ जो दु:खी होगा?'
'हुआ करे। उनके दु:खी होने के डर से हम बिल क्यों खोदें?'
'बेटा,