झुनिया एक हाथ में भरी हुई चिलम, दूसरे में रस का लोटा लिए बड़ी फुर्ती से आ पहुँची। फिर रस्सी और कलसा ले कर पानी भरने चली। गोबर ने उसके हाथ से कलसा लेने के लिए हाथ बढ़ा कर झेंपते हुए कहा - तुम रहने दो, मैं भरे लाता हूँ।
झुनिया ने कलसा न दिया। कुएँ के जगत पर जा कर मुस्कराती हुई बोली - तुम हमारे मेहमान हो। कहोगे, एक लोटा पानी भी किसी ने न दिया।
'मेहमान काहे से हो गया। तुम्हारा पड़ोसी ही तो हूँ।'
'पड़ोसी साल-भर में एक बार भी सूरत न दिखाए, तो मेहमान ही है।'
झुनिया एक हाथ में भरी हुई चिलम, दूसरे में रस का लोटा लिए बड़ी फुर्ती से आ पहुँची। फिर रस्सी और कलसा ले कर पानी भरने चली। गोबर ने उसके हाथ से कलसा लेने के लिए हाथ बढ़ा कर झेंपते हुए कहा - तुम रहने दो, मैं भरे लाता हूँ।
झुनिया ने कलसा न दिया। कुएँ के जगत पर जा कर मुस्कराती हुई बोली - तुम हमारे मेहमान हो। कहोगे, एक लोटा पानी भी किसी ने न दिया।
'मेहमान काहे से हो गया। तुम्हारा पड़ोसी ही तो हूँ।'
'पड़ोसी साल-भर में एक बार भी सूरत न दिखाए, तो मेहमान ही है।'