तो पचीस रुपए वहीं उनको दे दिए, और आज वह दो साल का बाकी निकालते हैं। मैंने कह दिया, मैं एक धेला न दूँगा।
गोबर ने पूछा - तुम्हारे पास रसीद होगी?
'रसीद कहाँ देते हैं?'
'तो तुम बिना रसीद लिए रुपए देते ही क्यों हो?'
'मैं क्या जानता था, यह लोग बेईमानी करेंगे। यह सब तुम्हारी करनी का फल है। तुमने रात को उनकी हँसी उड़ाई, यह उसी का दंड है। पानी में रह कर मगर से बैर नहीं किया जाता। सूद लगा कर सत्तर रुपए बाकी निकाल दिए। ये किसके घर से आएँगे?'
तो पचीस रुपए वहीं उनको दे दिए, और आज वह दो साल का बाकी निकालते हैं। मैंने कह दिया, मैं एक धेला न दूँगा।
गोबर ने पूछा - तुम्हारे पास रसीद होगी?
'रसीद कहाँ देते हैं?'
'तो तुम बिना रसीद लिए रुपए देते ही क्यों हो?'
'मैं क्या जानता था, यह लोग बेईमानी करेंगे। यह सब तुम्हारी करनी का फल है। तुमने रात को उनकी हँसी उड़ाई, यह उसी का दंड है। पानी में रह कर मगर से बैर नहीं किया जाता। सूद लगा कर सत्तर रुपए बाकी निकाल दिए। ये किसके घर से आएँगे?'