गोदान - Godan

उठा कर देखा भी नहीं। गोबर बालक को गोद में लिए आगे-आगे था। झुनिया बिस्तर बगल में दबाए पीछे। एक चमार का लड़का संदूक लिए था। गाँव के कई स्त्री-पुरुष गोबर को पहुँचाने गाँव के बाहर तक आए।

और धनिया बैठी रो रही थी, जैसे कोई उसके हृदय को आरे से चीर रहा हो। उसका मातृत्व उस घर के समान हो रहा था, जिसमें आग लग गई हो और सब कुछ भस्म हो गया हो। बैठ कर रोने के लिए भी स्थान न बचा हो।


भाग 22

इधर कुछ दिनों से रायसाहब की कन्या के विवाह


1079 of 1753

उठा कर देखा भी नहीं। गोबर बालक को गोद में लिए आगे-आगे था। झुनिया बिस्तर बगल में दबाए पीछे। एक चमार का लड़का संदूक लिए था। गाँव के कई स्त्री-पुरुष गोबर को पहुँचाने गाँव के बाहर तक आए।

और धनिया बैठी रो रही थी, जैसे कोई उसके हृदय को आरे से चीर रहा हो। उसका मातृत्व उस घर के समान हो रहा था, जिसमें आग लग गई हो और सब कुछ भस्म हो गया हो। बैठ कर रोने के लिए भी स्थान न बचा हो।


भाग 22

इधर कुछ दिनों से रायसाहब की कन्या के विवाह


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