यह कहते हुए उन्होंने दराज से चेकबुक निकाली और एक हजार लिख कर डरते-डरते मालती की तरफ बढ़ाया।
मालती ने चैक ले कर निर्दय व्यंग किया - यह मेरे व्यवहार का मूल्य है या व्यायामशाला का चंदा?
खन्ना सजल आँखों से बोले - अब मेरी जान बख्शो मालती, क्यों मेरे मुँह में कालिख पोत रही हो।
मालती ने जोर से कहकहा मारा - देखो, डाँट बताई और एक हजार रुपए भी वसूल किए। अब तो तुम कभी ऐसी शरारत न करोगे?
'कभी नहीं, जीते जी कभी नहीं।'
'कान पकड़ो।'
यह कहते हुए उन्होंने दराज से चेकबुक निकाली और एक हजार लिख कर डरते-डरते मालती की तरफ बढ़ाया।
मालती ने चैक ले कर निर्दय व्यंग किया - यह मेरे व्यवहार का मूल्य है या व्यायामशाला का चंदा?
खन्ना सजल आँखों से बोले - अब मेरी जान बख्शो मालती, क्यों मेरे मुँह में कालिख पोत रही हो।
मालती ने जोर से कहकहा मारा - देखो, डाँट बताई और एक हजार रुपए भी वसूल किए। अब तो तुम कभी ऐसी शरारत न करोगे?
'कभी नहीं, जीते जी कभी नहीं।'
'कान पकड़ो।'