'कान पकड़ता हूँ, मगर अब तुम दया करके जाओ और मुझे एकांत में बैठ कर सोचने और रोने दो। तुमने आज मेरे जीवन का सारा आनंद……..।'
मालती और जोर से हँसी - देखो, तुम मेरा बहुत अपमान कर रहे हो और तुम जानते हो, रूप अपमान नहीं सह सकता। मैंने तो तुम्हारे साथ भलाई की और तुम उसे बुराई समझ रहे हो।
खन्ना विद्रोह-भरी आँखों से देख कर बोले - तुमने मेरे साथ भलाई की है या उलटी छुरी से मेरा गला रेता है?
'क्यों, मैं तुम्हें लूट-लूट कर अपना घर भर रही थी। तुम उस लूट से बच गए।'
'कान पकड़ता हूँ, मगर अब तुम दया करके जाओ और मुझे एकांत में बैठ कर सोचने और रोने दो। तुमने आज मेरे जीवन का सारा आनंद……..।'
मालती और जोर से हँसी - देखो, तुम मेरा बहुत अपमान कर रहे हो और तुम जानते हो, रूप अपमान नहीं सह सकता। मैंने तो तुम्हारे साथ भलाई की और तुम उसे बुराई समझ रहे हो।
खन्ना विद्रोह-भरी आँखों से देख कर बोले - तुमने मेरे साथ भलाई की है या उलटी छुरी से मेरा गला रेता है?
'क्यों, मैं तुम्हें लूट-लूट कर अपना घर भर रही थी। तुम उस लूट से बच गए।'