'क्यों घाव पर नमक छिड़क रही हो मालती! मैं भी आदमी हूँ।'
मालती ने इस तरह खन्ना की ओर देखा, मानो निश्चय करना चाहती थी कि वह आदमी है या नहीं?
'अभी तो मुझे इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता।'
'तुम बिलकुल पहेली हो, आज यह साबित हो गया।'
'हाँ, तुम्हारे लिए पहेली हूँ और पहेली रहूँगी।'
यह कहती हुई वह पक्षी की भाँति फुर्र से उड़ गई और खन्ना सिर पर हाथ रख कर सोचने लगे, यह लीला है या इसका सच्चा रूप।
भाग 23
गोबर और झुनिया
'क्यों घाव पर नमक छिड़क रही हो मालती! मैं भी आदमी हूँ।'
मालती ने इस तरह खन्ना की ओर देखा, मानो निश्चय करना चाहती थी कि वह आदमी है या नहीं?
'अभी तो मुझे इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता।'
'तुम बिलकुल पहेली हो, आज यह साबित हो गया।'
'हाँ, तुम्हारे लिए पहेली हूँ और पहेली रहूँगी।'
यह कहती हुई वह पक्षी की भाँति फुर्र से उड़ गई और खन्ना सिर पर हाथ रख कर सोचने लगे, यह लीला है या इसका सच्चा रूप।
भाग 23
गोबर और झुनिया