मैं अब बुढ़िया हुई, मुझसे क्या हँसी।'
'तुम अभी बुढ़िया कैसे हो गईं भाभी? मुझे तो अब भी.....'
'अच्छा, चुप ही रहना, नहीं डेढ़ सौ गाली दूँगी। लड़का परदेस कमाने लगा, एक दिन नेवता भी न खिलाया, सेंत-मेंत में भाभी बनाने को तैयार।'
'मुझसे कसम ले लो भाभी, जो मैंने उसकी कमाई का एक पैसा भी छुआ हो। न जाने क्या लाया, कहाँ खरच किया, मुझे कुछ भी पता नहीं। बस, एक जोड़ा धोती और एक पगड़ी मेरे हाथ लगी।'
'अच्छा कमाने तो लगा, आज नहीं
मैं अब बुढ़िया हुई, मुझसे क्या हँसी।'
'तुम अभी बुढ़िया कैसे हो गईं भाभी? मुझे तो अब भी.....'
'अच्छा, चुप ही रहना, नहीं डेढ़ सौ गाली दूँगी। लड़का परदेस कमाने लगा, एक दिन नेवता भी न खिलाया, सेंत-मेंत में भाभी बनाने को तैयार।'
'मुझसे कसम ले लो भाभी, जो मैंने उसकी कमाई का एक पैसा भी छुआ हो। न जाने क्या लाया, कहाँ खरच किया, मुझे कुछ भी पता नहीं। बस, एक जोड़ा धोती और एक पगड़ी मेरे हाथ लगी।'
'अच्छा कमाने तो लगा, आज नहीं