गोदान - Godan

चले थे गाय लेने! पट्ठे ने इतनी फुर्ती से नाँद गाड़ दी, मानो इसी की कसर थी। भोला है तो अपने घर का मालिक, लेकिन जब लड़के सयाने हो गए, तो बाप की कौन चलती है? कामता और जंगी अकड़ जायँ तो क्या भोला अपने मन से गाय मुझे दे देंगे? कभी नहीं।

सहसा गोबर चौंक कर उठ बैठा और आँखें मलता हुआ बोला - अरे! यह तो भोर हो गया। तुमने नाँद गाड़ दी दादा?

होरी गोबर के सुगठित शरीर और चौड़ी छाती की ओर गर्व से देख कर और मन में यह सोचते हुए कि कहीं इसे गोरस मिलता,


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चले थे गाय लेने! पट्ठे ने इतनी फुर्ती से नाँद गाड़ दी, मानो इसी की कसर थी। भोला है तो अपने घर का मालिक, लेकिन जब लड़के सयाने हो गए, तो बाप की कौन चलती है? कामता और जंगी अकड़ जायँ तो क्या भोला अपने मन से गाय मुझे दे देंगे? कभी नहीं।

सहसा गोबर चौंक कर उठ बैठा और आँखें मलता हुआ बोला - अरे! यह तो भोर हो गया। तुमने नाँद गाड़ दी दादा?

होरी गोबर के सुगठित शरीर और चौड़ी छाती की ओर गर्व से देख कर और मन में यह सोचते हुए कि कहीं इसे गोरस मिलता,


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