तो कैसा पट्ठा हो जाता, बोला - नहीं, अभी नहीं गाड़ी। सोचा, कहीं न मिले, तो नाहक भद्द हो।
गोबर ने त्योरी चढ़ा कर कहा - मिलेगी क्यों नहीं?
'उनके मन में कोई चोर पैठ जाय?'
'चोर पैठे या डाय, गाय तो उन्हें देनी ही पड़ेगी।'
गोबर ने और कुछ न कहा - लाठी कंधों पर रखी और चल दिया। होरी उसे जाते देखता हुआ अपना कलेजा ठंडा करता रहा। अब लड़के की सगाई में देर न करनी चाहिए। सत्रहवाँ लग गया; मगर करे कैसे? कहीं पैसे के भी दरसन हों। जब से तीनों भाइयों में अलगौझा हो गया,
तो कैसा पट्ठा हो जाता, बोला - नहीं, अभी नहीं गाड़ी। सोचा, कहीं न मिले, तो नाहक भद्द हो।
गोबर ने त्योरी चढ़ा कर कहा - मिलेगी क्यों नहीं?
'उनके मन में कोई चोर पैठ जाय?'
'चोर पैठे या डाय, गाय तो उन्हें देनी ही पड़ेगी।'
गोबर ने और कुछ न कहा - लाठी कंधों पर रखी और चल दिया। होरी उसे जाते देखता हुआ अपना कलेजा ठंडा करता रहा। अब लड़के की सगाई में देर न करनी चाहिए। सत्रहवाँ लग गया; मगर करे कैसे? कहीं पैसे के भी दरसन हों। जब से तीनों भाइयों में अलगौझा हो गया,