से ब्राह्मणों द्वारा अन्य जातियों की कन्याओं के ग्रहण किए जाने की एक लंबी सूची पेश की और यह सिद्ध कर दिया कि उनसे जो संतान हुई, वह ब्राह्मण कहलाई और आजकल के जो ब्राह्मण हैं, वह उन्हीं संतानों की संतान हैं। यह प्रथा आदिकाल से चली आई है और इसमें कोई लज्जा की बात नहीं।
झिंगुरीसिंह उनके पांडित्य पर मुग्ध हो कर बोले - तब क्यों आजकल लोग वाजपेयी और सुकुल बने फिरते हैं?
'समय-समय की परथा है और क्या! किसी में उतना तेज तो हो।
से ब्राह्मणों द्वारा अन्य जातियों की कन्याओं के ग्रहण किए जाने की एक लंबी सूची पेश की और यह सिद्ध कर दिया कि उनसे जो संतान हुई, वह ब्राह्मण कहलाई और आजकल के जो ब्राह्मण हैं, वह उन्हीं संतानों की संतान हैं। यह प्रथा आदिकाल से चली आई है और इसमें कोई लज्जा की बात नहीं।
झिंगुरीसिंह उनके पांडित्य पर मुग्ध हो कर बोले - तब क्यों आजकल लोग वाजपेयी और सुकुल बने फिरते हैं?
'समय-समय की परथा है और क्या! किसी में उतना तेज तो हो।