गोदान - Godan



दातादीन के अभिमान को चोट लगी। दाढ़ी पर हाथ फेर कर बोले - पास कुछ न सही, मैं भीख ही माँगता हूँ, लेकिन मैंने अपने लड़कियों के ब्याह में पाँच-पाँच सौ दिए हैं, फिर लड़के के लिए पाँच सौ क्यों न माँगूँ? किसी ने सेंत-मेंत में मेरी लड़की ब्याह ली होती, तो मैं भी सेंत में लड़का ब्याह लेता। रही हैसियत की बात। तुम जजमानी को भीख समझो, मैं तो उसे जमींदारी समझता हूँ, बंकघर। जमींदार मिट जाय, बंकघर टूट जाय, लेकिन जजमानी अंत तक बनी


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दातादीन के अभिमान को चोट लगी। दाढ़ी पर हाथ फेर कर बोले - पास कुछ न सही, मैं भीख ही माँगता हूँ, लेकिन मैंने अपने लड़कियों के ब्याह में पाँच-पाँच सौ दिए हैं, फिर लड़के के लिए पाँच सौ क्यों न माँगूँ? किसी ने सेंत-मेंत में मेरी लड़की ब्याह ली होती, तो मैं भी सेंत में लड़का ब्याह लेता। रही हैसियत की बात। तुम जजमानी को भीख समझो, मैं तो उसे जमींदारी समझता हूँ, बंकघर। जमींदार मिट जाय, बंकघर टूट जाय, लेकिन जजमानी अंत तक बनी


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