गोदान - Godan



'तुम घबड़ाते क्यों हो, मैं ओसा दूँगी, ढो कर रख भी आऊँगी। पहर रात तक यहाँ दाना भी न रहेगा।'

दुलारी सहुआइन आज अपना लेहना वसूल करती फिरती थी। सिलिया उसकी दुकान से होली के दिन दो पैसे का गुलाबी रंग लाई थी। अभी तक पैसे न दिए थे। सिलिया के पास आ कर बोली - क्यों री सिलिया, महीना भर रंग लाए हो गया, अभी तक पैसे नहीं दिए? माँगती हूँ तो मटक कर चली जाती है। आज मैं बिना पैसे लिए न जाऊँगी।

मातादीन चुपके-से सरक गया था। सिलिया


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'तुम घबड़ाते क्यों हो, मैं ओसा दूँगी, ढो कर रख भी आऊँगी। पहर रात तक यहाँ दाना भी न रहेगा।'

दुलारी सहुआइन आज अपना लेहना वसूल करती फिरती थी। सिलिया उसकी दुकान से होली के दिन दो पैसे का गुलाबी रंग लाई थी। अभी तक पैसे न दिए थे। सिलिया के पास आ कर बोली - क्यों री सिलिया, महीना भर रंग लाए हो गया, अभी तक पैसे नहीं दिए? माँगती हूँ तो मटक कर चली जाती है। आज मैं बिना पैसे लिए न जाऊँगी।

मातादीन चुपके-से सरक गया था। सिलिया


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