धनिया ने जान बचाई - यह सोचना मरदों का काम है।
होरी के पास जवाब तैयार था - मान ले, मैं न होता, तू ही अकेली रहती, तब तू क्या करती? वह कर।
धनिया ने तिरस्कार-भरी आँखों से देखा - तब मैं कुस-कन्या भी दे देती तो कोई हँसने वाला न था।
कुश-कन्या होरी भी दे सकता था। इसी में उसका मंगल था, लेकिन कुल-मर्यादा कैसे छोड़ दे? उसकी बहनों के विवाह में तीन-तीन सौ बराती द्वार पर आए थे। दहेज भी अच्छा ही दिया गया था। नाच-तमाशा, बाजा-गाजा,
धनिया ने जान बचाई - यह सोचना मरदों का काम है।
होरी के पास जवाब तैयार था - मान ले, मैं न होता, तू ही अकेली रहती, तब तू क्या करती? वह कर।
धनिया ने तिरस्कार-भरी आँखों से देखा - तब मैं कुस-कन्या भी दे देती तो कोई हँसने वाला न था।
कुश-कन्या होरी भी दे सकता था। इसी में उसका मंगल था, लेकिन कुल-मर्यादा कैसे छोड़ दे? उसकी बहनों के विवाह में तीन-तीन सौ बराती द्वार पर आए थे। दहेज भी अच्छा ही दिया गया था। नाच-तमाशा, बाजा-गाजा,