लेकिन धनिया नहीं मानती। उसकी मरजी बिना चला जाऊँ, तो घर में रहना अपाढ़ कर दे। उसका सुभाव तो जानती हो।
दुलारी ने कटाक्ष करके कहा - तुम तो मेहरिया के जैसे गुलाम हो गए।
'तुमने पूछा ही नहीं तो क्या करता?'
'मेरी गुलामी करने को कहते तो मैंने लिखा लिया होता, सच।'
'तो अब से क्या बिगड़ा है, लिखा लो न। दो सौ में लिखता हूँ, इन दामों महँगा नहीं हूँ।'
'तब धनिया से तो न बोलोगे?'
'नहीं, कहो कसम खाऊँ।'
'और जो बोले?'
'तो मेरी जीभ काट लेना।'
लेकिन धनिया नहीं मानती। उसकी मरजी बिना चला जाऊँ, तो घर में रहना अपाढ़ कर दे। उसका सुभाव तो जानती हो।
दुलारी ने कटाक्ष करके कहा - तुम तो मेहरिया के जैसे गुलाम हो गए।
'तुमने पूछा ही नहीं तो क्या करता?'
'मेरी गुलामी करने को कहते तो मैंने लिखा लिया होता, सच।'
'तो अब से क्या बिगड़ा है, लिखा लो न। दो सौ में लिखता हूँ, इन दामों महँगा नहीं हूँ।'
'तब धनिया से तो न बोलोगे?'
'नहीं, कहो कसम खाऊँ।'
'और जो बोले?'
'तो मेरी जीभ काट लेना।'