गोदान - Godan



'अच्छा तो जाओ, बर ठीक-ठाक करो, मैं रुपए दे दूँगी।'

होरी ने सजल नेत्रों से दुलारी के पाँव पकड़ लिए। भावावेश से मुँह बंद हो गया।

सहुआइन ने पाँव खींच कर कहा - अब यही सरारत मुझे अच्छी नहीं लगती। मैं साल-भर के भीतर अपने रुपए सूद-समेत कान पकड़ कर लूँगी। तुम तो व्यवहार के ऐसे सच्चे नहीं हो; लेकिन धनिया पर मुझे विश्वास है। सुना पंडित तुमसे बहुत बिगड़े हुए हैं। कहते हैं इसे गाँव से निकाल कर नहीं छोड़ा तो बाँभन नहीं। तुम


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'अच्छा तो जाओ, बर ठीक-ठाक करो, मैं रुपए दे दूँगी।'

होरी ने सजल नेत्रों से दुलारी के पाँव पकड़ लिए। भावावेश से मुँह बंद हो गया।

सहुआइन ने पाँव खींच कर कहा - अब यही सरारत मुझे अच्छी नहीं लगती। मैं साल-भर के भीतर अपने रुपए सूद-समेत कान पकड़ कर लूँगी। तुम तो व्यवहार के ऐसे सच्चे नहीं हो; लेकिन धनिया पर मुझे विश्वास है। सुना पंडित तुमसे बहुत बिगड़े हुए हैं। कहते हैं इसे गाँव से निकाल कर नहीं छोड़ा तो बाँभन नहीं। तुम


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