पेड़-पालो हैं, घर है, जवान बेटा है। तुम्हारे रुपए मारे न जाएँगे, मेरी इज्जत जा रही है, इसे सँभालो। मगर दुलारी ने दया को व्यापार में मिलाना स्वीकार न किया। अगर व्यापार को वह दया का रूप दे सकती, तो उसे कोई आपत्ति न होती। पर दया को व्यापार का रूप देना उसने न सीखा था।
होरी ने घर आ कर धनिया से कहा - अब?
धनिया ने उसी पर दिल का गुबार निकाला - यही तो तुम चाहते थे!
होरी ने जख्मी आँखों से देखा - मेरा ही दोस है?
'किसी का दोस हो, हुई तुम्हारे मन की।'
पेड़-पालो हैं, घर है, जवान बेटा है। तुम्हारे रुपए मारे न जाएँगे, मेरी इज्जत जा रही है, इसे सँभालो। मगर दुलारी ने दया को व्यापार में मिलाना स्वीकार न किया। अगर व्यापार को वह दया का रूप दे सकती, तो उसे कोई आपत्ति न होती। पर दया को व्यापार का रूप देना उसने न सीखा था।
होरी ने घर आ कर धनिया से कहा - अब?
धनिया ने उसी पर दिल का गुबार निकाला - यही तो तुम चाहते थे!
होरी ने जख्मी आँखों से देखा - मेरा ही दोस है?
'किसी का दोस हो, हुई तुम्हारे मन की।'