'तेरी इच्छा है कि जमीन रेहन रख दूँ?'
'जमीन रेहन रख दोगे, तो करोगे क्या?'
'मजूरी'?
मगर जमीन दोनों को एक-सी प्यारी थी। उसी पर तो उनकी इज्जत और आबरू अवलंबित थी। जिसके पास जमीन नहीं, वह गृहस्थ नहीं, मजूर है।
होरी ने कुछ जवाब न पा कर पूछा - तो क्या कहती है?
धनिया ने आहत कंठ से कहा - कहना क्या है। गौरी बारात ले कर आयँगे। एक जून खिला देना। सबेरे बेटी विदा कर देना। दुनिया हँसेगी, हँस ले। भगवान की यही इच्छा है, कि हमारी नाक कटे,
'तेरी इच्छा है कि जमीन रेहन रख दूँ?'
'जमीन रेहन रख दोगे, तो करोगे क्या?'
'मजूरी'?
मगर जमीन दोनों को एक-सी प्यारी थी। उसी पर तो उनकी इज्जत और आबरू अवलंबित थी। जिसके पास जमीन नहीं, वह गृहस्थ नहीं, मजूर है।
होरी ने कुछ जवाब न पा कर पूछा - तो क्या कहती है?
धनिया ने आहत कंठ से कहा - कहना क्या है। गौरी बारात ले कर आयँगे। एक जून खिला देना। सबेरे बेटी विदा कर देना। दुनिया हँसेगी, हँस ले। भगवान की यही इच्छा है, कि हमारी नाक कटे,