गोदान - Godan



उसने झुनिया को जगाया नहीं। कुछ बोला भी नहीं। चुपके से खिचड़ी थाली में निकाली और दो-चार कौर निगल कर बरामदे में लेट रहा। पिछले पहर उसे सर्दी लगी। कोठरी से कंबल लेने गया तो झुनिया के कराहने की आवाज सुनी। नशा उतर चुका था। पूछा - कैसा जी है झुनिया! कहीं दरद है क्या।

'हाँ, पेट में जोर से दरद हो रहा है?'

'तूने पहले क्यों नहीं कहा अब इस बखत कहाँ जाऊँ?'

'किससे कहती?'

'मैं मर गया था क्या?'

'तुम्हें मेरे मरने-जीने की क्या चिंता?'


1325 of 1753



उसने झुनिया को जगाया नहीं। कुछ बोला भी नहीं। चुपके से खिचड़ी थाली में निकाली और दो-चार कौर निगल कर बरामदे में लेट रहा। पिछले पहर उसे सर्दी लगी। कोठरी से कंबल लेने गया तो झुनिया के कराहने की आवाज सुनी। नशा उतर चुका था। पूछा - कैसा जी है झुनिया! कहीं दरद है क्या।

'हाँ, पेट में जोर से दरद हो रहा है?'

'तूने पहले क्यों नहीं कहा अब इस बखत कहाँ जाऊँ?'

'किससे कहती?'

'मैं मर गया था क्या?'

'तुम्हें मेरे मरने-जीने की क्या चिंता?'


1325 of 1753