गोबर घबराया, कहाँ दाई खोजने जाय? इस वक्त वह आने ही क्यों लगी? घर में कुछ है भी तो नहीं। चुड़ैल ने पहले बता दिया होता तो किसी से दो-चार रुपए माँग लाता। इन्हीं हाथों में सौ-पचास रुपए हरदम पड़े रहते थे, चार आदमी खुसामद करते थे। इस कुलच्छनी के आते ही जैसे लच्छमी रूठ गई। टके-टके को मुहताज हो गया।
सहसा किसी ने पुकारा - यह क्या तुम्हारी घरवाली कराह रही है? दरद तो नहीं हो रहा है?
यह वही मोटी औरत थी, जिससे आज झुनिया की बातचीत
गोबर घबराया, कहाँ दाई खोजने जाय? इस वक्त वह आने ही क्यों लगी? घर में कुछ है भी तो नहीं। चुड़ैल ने पहले बता दिया होता तो किसी से दो-चार रुपए माँग लाता। इन्हीं हाथों में सौ-पचास रुपए हरदम पड़े रहते थे, चार आदमी खुसामद करते थे। इस कुलच्छनी के आते ही जैसे लच्छमी रूठ गई। टके-टके को मुहताज हो गया।
सहसा किसी ने पुकारा - यह क्या तुम्हारी घरवाली कराह रही है? दरद तो नहीं हो रहा है?
यह वही मोटी औरत थी, जिससे आज झुनिया की बातचीत