गोदान - Godan

हुई थी। घोड़े को दाना खिलाने उठी थी। झुनिया का कराहना सुन कर पूछने आ गई थी।

गोबर ने बरामदे में जा कर कहा - पेट में दरद है। छटपटा रही है। यहाँ कोई दाई मिलेगी?

'वह तो मैं आज उसे देख कर ही समझ गई थी। दाई कच्ची सराय में रहती है। लपक कर बुला लाओ। कहना, जल्दी चल। तब तक मैं यहीं बैठी हूँ।'

'मैंने तो कच्ची सराय नहीं देखी, किधर है?'

'अच्छा, तुम उसे पंखा झलते रहो, मैं बुलाए लाती हूँ। यही कहते हैं, अनाड़ी आदमी किसी काम का नहीं। पूरा पेट और दाई की खबर नहीं।'


1327 of 1753

हुई थी। घोड़े को दाना खिलाने उठी थी। झुनिया का कराहना सुन कर पूछने आ गई थी।

गोबर ने बरामदे में जा कर कहा - पेट में दरद है। छटपटा रही है। यहाँ कोई दाई मिलेगी?

'वह तो मैं आज उसे देख कर ही समझ गई थी। दाई कच्ची सराय में रहती है। लपक कर बुला लाओ। कहना, जल्दी चल। तब तक मैं यहीं बैठी हूँ।'

'मैंने तो कच्ची सराय नहीं देखी, किधर है?'

'अच्छा, तुम उसे पंखा झलते रहो, मैं बुलाए लाती हूँ। यही कहते हैं, अनाड़ी आदमी किसी काम का नहीं। पूरा पेट और दाई की खबर नहीं।'


1327 of 1753