हुए मिल में दाखिल हुए और पराजित हड़ताली अपने हताहतों को उठा-उठा कर अस्पताल पहुँचाने लगे, मगर अस्पताल में इतने आदमियों के लिए जगह न थी। मिर्जा जी तो ले लिए गए। गोबर की मरहम-पट्टी करके उसके घर पहुँचा दिया गया।
झुनिया ने गोबर की वह चेष्टाहीन लोथ देखी, तो उसका नारीत्व जाग उठा। अब तक उसने उसे सबल के रूप में देखा था, जो उस पर शासन करता था, डाँटता था, मारता था। आज वह अपंग था, निस्सहाय था, दयनीय था। झुनिया ने खाट पर झुक कर
हुए मिल में दाखिल हुए और पराजित हड़ताली अपने हताहतों को उठा-उठा कर अस्पताल पहुँचाने लगे, मगर अस्पताल में इतने आदमियों के लिए जगह न थी। मिर्जा जी तो ले लिए गए। गोबर की मरहम-पट्टी करके उसके घर पहुँचा दिया गया।
झुनिया ने गोबर की वह चेष्टाहीन लोथ देखी, तो उसका नारीत्व जाग उठा। अब तक उसने उसे सबल के रूप में देखा था, जो उस पर शासन करता था, डाँटता था, मारता था। आज वह अपंग था, निस्सहाय था, दयनीय था। झुनिया ने खाट पर झुक कर