आँसू-भरी आँखों से गोबर को देखा और घर की दशा का खयाल करके उसे गोबर पर एक ईर्ष्यामय क्रोध आया। गोबर जानता था कि घर में एक पैसा नहीं है। वह यह भी जानता था कि कहीं से एक पैसा मिलने की आशा नहीं है। यह जानते हुए भी उसके बार-बार समझाने पर भी, उसने यह विपत्ति अपने ऊपर ली। उसने कितनी बार कहा था तुम इस झगड़े में न पड़ो। आग लगाने वाले आग लगा कर अलग हो जाएँगे, जायगी गरीबो के सिर; लेकिन वह कब उसकी सुनने लगा था! वह तो उसकी बैरिन थी। मित्र तो वह लोग थे,
आँसू-भरी आँखों से गोबर को देखा और घर की दशा का खयाल करके उसे गोबर पर एक ईर्ष्यामय क्रोध आया। गोबर जानता था कि घर में एक पैसा नहीं है। वह यह भी जानता था कि कहीं से एक पैसा मिलने की आशा नहीं है। यह जानते हुए भी उसके बार-बार समझाने पर भी, उसने यह विपत्ति अपने ऊपर ली। उसने कितनी बार कहा था तुम इस झगड़े में न पड़ो। आग लगाने वाले आग लगा कर अलग हो जाएँगे, जायगी गरीबो के सिर; लेकिन वह कब उसकी सुनने लगा था! वह तो उसकी बैरिन थी। मित्र तो वह लोग थे,