वह उसी तरह बड़ी देर तक गोबर का मुँह देखती रही। वह क्षीण होती हुई आशा से जीवन का कोई लक्षण पा लेना चाहती थी। और प्रतिक्षण उसका धैर्य अस्त होने वाले सूर्य की भाँति डूबता जाता था, और भविष्य में अंधकार उसे अपने अंदर समेटे लेता था।
सहसा चुहिया ने आ कर पुकारा - गोबर का क्या हाल है, बहू! मैंने तो अभी सुना। दुकान से दौड़ी आई हूँ।
झुनिया के रुके हुए आँसू उबल पड़े, कुछ बोल न सकी। भयभीत आँखों से चुहिया की ओर देखा।
चुहिया ने गोबर का मुँह देखा,
वह उसी तरह बड़ी देर तक गोबर का मुँह देखती रही। वह क्षीण होती हुई आशा से जीवन का कोई लक्षण पा लेना चाहती थी। और प्रतिक्षण उसका धैर्य अस्त होने वाले सूर्य की भाँति डूबता जाता था, और भविष्य में अंधकार उसे अपने अंदर समेटे लेता था।
सहसा चुहिया ने आ कर पुकारा - गोबर का क्या हाल है, बहू! मैंने तो अभी सुना। दुकान से दौड़ी आई हूँ।
झुनिया के रुके हुए आँसू उबल पड़े, कुछ बोल न सकी। भयभीत आँखों से चुहिया की ओर देखा।
चुहिया ने गोबर का मुँह देखा,