उसकी छाती पर हाथ रखा, और आश्वासन-भरे स्वर में बोली - यह चार दिन में अच्छे हो जाएँगे। घबड़ा मत। कुशल हुई। तेरा सोहाग बलवान था। कई आदमी उसी दंगे में मर गए। घर में कुछ रुपए-पैसे हैं?
झुनिया ने लज्जा से सिर हिला दिया।
'मैं लाए देती हूँ। थोड़ा-सा दूध ला कर गरम कर ले।'
झुनिया ने उसके पाँव पकड़ कर कहा - दीदी, तुम्हीं मेरी माता हो। मेरा दूसरा कोई नहीं है।
जाड़ों की उदास संध्या आज और भी उदास मालूम हो रही थी। झुनिया ने
उसकी छाती पर हाथ रखा, और आश्वासन-भरे स्वर में बोली - यह चार दिन में अच्छे हो जाएँगे। घबड़ा मत। कुशल हुई। तेरा सोहाग बलवान था। कई आदमी उसी दंगे में मर गए। घर में कुछ रुपए-पैसे हैं?
झुनिया ने लज्जा से सिर हिला दिया।
'मैं लाए देती हूँ। थोड़ा-सा दूध ला कर गरम कर ले।'
झुनिया ने उसके पाँव पकड़ कर कहा - दीदी, तुम्हीं मेरी माता हो। मेरा दूसरा कोई नहीं है।
जाड़ों की उदास संध्या आज और भी उदास मालूम हो रही थी। झुनिया ने