धनिया ने नकली विनय का नाटक करके कहा - क्या करूँ, तुम दुलार ही इतना करते हो कि मेरा सिर फिर गया है।
'तू घर में रहने देगी कि नहीं?'
'घर तुम्हारा, मालिक तुम, मैं भला कौन होती हूँ तुम्हें घर से निकालने वाली?'
होरी आज धनिया से किसी तरह पेश नहीं पा सकता। उसकी अक्ल जैसे कुंद हो गई है। इन व्यंग्य-बाणों के रोकने के लिए उसके पास कोई ढाल नहीं है। धीरे से कुदाल रख दी और गमछा ले कर नहाने चला गया। लौटा कोई आधा घंटे में, मगर
धनिया ने नकली विनय का नाटक करके कहा - क्या करूँ, तुम दुलार ही इतना करते हो कि मेरा सिर फिर गया है।
'तू घर में रहने देगी कि नहीं?'
'घर तुम्हारा, मालिक तुम, मैं भला कौन होती हूँ तुम्हें घर से निकालने वाली?'
होरी आज धनिया से किसी तरह पेश नहीं पा सकता। उसकी अक्ल जैसे कुंद हो गई है। इन व्यंग्य-बाणों के रोकने के लिए उसके पास कोई ढाल नहीं है। धीरे से कुदाल रख दी और गमछा ले कर नहाने चला गया। लौटा कोई आधा घंटे में, मगर