गोबर अभी तक न आया था। अकेले कैसे भोजन करे। लौंडा वहाँ जा कर सो रहा। भोला की वह मदमाती छोकरी है न झुनिया। उसके साथ हँसी-दिल्लगी कर रहा होगा। कल भी तो उसके पीछे लगा हुआ था। नहीं गाय दी, तो लौट क्यों नहीं आया। क्या वहाँ ढई देगा।
धनिया ने कहा - अब खड़े क्या हो? गोबर साँझ को आएगा।
होरी ने और कुछ न कहा - कहीं धनिया फिर न कुछ कह बैठे।
भोजन करके नीम की छाँह में लेट रहा।
रूपा रोती हुई आई। नंगे बदन एक लँगोटी लगाए, झबरे
गोबर अभी तक न आया था। अकेले कैसे भोजन करे। लौंडा वहाँ जा कर सो रहा। भोला की वह मदमाती छोकरी है न झुनिया। उसके साथ हँसी-दिल्लगी कर रहा होगा। कल भी तो उसके पीछे लगा हुआ था। नहीं गाय दी, तो लौट क्यों नहीं आया। क्या वहाँ ढई देगा।
धनिया ने कहा - अब खड़े क्या हो? गोबर साँझ को आएगा।
होरी ने और कुछ न कहा - कहीं धनिया फिर न कुछ कह बैठे।
भोजन करके नीम की छाँह में लेट रहा।
रूपा रोती हुई आई। नंगे बदन एक लँगोटी लगाए, झबरे