किया और मन में अभिमानमय उल्लास का आनंद उठाता हुआ, बड़े सम्मान से पंडितजी को आँगन में ले गया। महाराज ने गऊ को अपने पुरानी अनुभवी आँखों से देखा, सींगें देखीं, थन देखा, पुट्टा देखा और घनी सफेद भौंहों के नीचे छिपी हुई आँखों में जवानी की उमंग भर कर बोले - कोई दोष नहीं है बेटा, बाल-भौंरी, सब ठीक। भगवान चाहेंगे, तो तुम्हारे भाग खुल जाएँगे, ऐसे अच्छे लच्छन हैं कि वाह! बस रातिब न कम होने पाए। एक-एक बाछा सौ-सौ का होगा।
होरी ने
किया और मन में अभिमानमय उल्लास का आनंद उठाता हुआ, बड़े सम्मान से पंडितजी को आँगन में ले गया। महाराज ने गऊ को अपने पुरानी अनुभवी आँखों से देखा, सींगें देखीं, थन देखा, पुट्टा देखा और घनी सफेद भौंहों के नीचे छिपी हुई आँखों में जवानी की उमंग भर कर बोले - कोई दोष नहीं है बेटा, बाल-भौंरी, सब ठीक। भगवान चाहेंगे, तो तुम्हारे भाग खुल जाएँगे, ऐसे अच्छे लच्छन हैं कि वाह! बस रातिब न कम होने पाए। एक-एक बाछा सौ-सौ का होगा।
होरी ने