आनंद के सागर में डुबकियाँ खाते हुए कहा - सब आपका असीरबाद है, दादा!
दातादीन ने सुरती की पीक थूकते हुए कहा - मेरा असीरबाद नहीं है बेटा, भगवान की दया है। यह सब प्रभु की दया है। रुपए नगद दिए?
होरी ने बे-पर की उड़ाई। अपने महाजन के सामने भी अपने समृद्धि-प्रदर्शन का ऐसा अवसर पा कर वह कैसे छोड़े। टके की नई टोपी सिर पर रख कर जब हम अकड़ने लगते हैं, जरा देर के लिए किसी सवारी पर बैठ कर जब हम आकाश में उड़ने लगते हैं, तो इतनी बड़ी
आनंद के सागर में डुबकियाँ खाते हुए कहा - सब आपका असीरबाद है, दादा!
दातादीन ने सुरती की पीक थूकते हुए कहा - मेरा असीरबाद नहीं है बेटा, भगवान की दया है। यह सब प्रभु की दया है। रुपए नगद दिए?
होरी ने बे-पर की उड़ाई। अपने महाजन के सामने भी अपने समृद्धि-प्रदर्शन का ऐसा अवसर पा कर वह कैसे छोड़े। टके की नई टोपी सिर पर रख कर जब हम अकड़ने लगते हैं, जरा देर के लिए किसी सवारी पर बैठ कर जब हम आकाश में उड़ने लगते हैं, तो इतनी बड़ी